रुद्रपुर। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि0) गुरमीत सिंह ने आज गोविन्द वल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर में आयोजित तीन दिवसीय 17वें कृषि विज्ञान कांग्रेस सम्मेलन एवं प्रदर्शनी समारोह का बतौर मुख्यातिथि दीप प्रज्वलित कर शुभारम्भ किया| तीन दिनों तक चलने वाले कृषि महाकुंभ में अलग अलग विषयों पर 10 थीम, 20 सेशन, 15 पेनल डिस्कसन, और सात सिम्बोजिया के दौरान चर्चाएं होंगी। अलग अलग बिंदुओं में चर्चा की जाएगी। कृषि विज्ञान के क्षेत्र में विशिष्ट कार्य करने वाले 16 वैज्ञानिकों को मुख्यातिथि द्वारा पुरूस्कार से सम्मानित किया गया।इस दौरान राज्यपाल ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि देश सदियों से कृषि प्रधान देश रहा है। यहाँ की पवित्र भूमि न केवल अन्न उत्पादन में समृद्ध है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की जड़ें भी कृषि से जुड़ी हुई हैं। हमारे सभी प्रमुख त्योहार भी कृषि से जुड़े हुए हैं। उन्होने कहा कि भारतीय किसानों की मेहनत और उनकी सहनशक्ति ने हमें खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया है। किन्तु आज हमें जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों की घटती उपलब्धता, और आधुनिक तकनीकों के समावेश जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए आज हमें अधिक उत्पादन के साथ ही सतत कृषि को अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बिना पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए हम अधिक से अधिक उत्पादन करें, यह हमारी नीतियों और अनुसंधान का उद्देश्य होना चाहिए। आज के परिपेक्ष्य में जल संरक्षण, जैविक खेती, प्राकृतिक उर्वरकों का उपयोग, और सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली जैसी तकनीकों को अपनाना अनिवार्य हो गया है। उन्होने कहा कि वर्तमान समय में मिट्टी का कटाव, जल संकट और जलवायु परिवर्तन कृषि को प्रभावित कर रहे हैं। हमें इन चुनौतियों से निपटने हेतु पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का सामंजस्य बिठाना होगा। उन्होने कहा कि 21वीं सदी की कृषि केवल परंपरागत तरीकों पर निर्भर नहीं रह सकती, हमें नवाचारों और तकनीकी विकास को अपनाना होगा। ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नैनो तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी और स्मार्ट खेती जैसे नवाचार किसानों की उत्पादकता को बढ़ा सकते हैं और उनके जीवन स्तर को सुधार सकते हैं।
उन्होने कहा कि हिमालय के पहाड़ जैविक खेती के केंद्र के रूप में कार्य कर सकते हैं। यह प्रसन्नता का विषय है कि हम प्राकृतिक कृषि युक्त राज्य बनने की ओर तेजी से अग्रसर हैं। उन्होने कहा कि बारह अनाज संस्कृति पहाड़ी संस्कृति की एक अनूठी विशेषता है। इस वर्ष हमारी सरकार ने मोटे अनाजों जैसे मडुंवा, झंगोरा, इत्यादि का उत्पादन बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया है। भारत सरकार का लक्ष्य भी मोटे अनाजों के उत्पादन में देश को वैश्विक केन्द्र बनाने का है। उत्तराखण्ड राज्य इस कार्यक्रम में अहम भूमिका निभा सकता है। राज्यपाल ने कहा कि भारत का दिल गांवों में धड़कता है और ग्रामीण समृद्धि के बिना विकसित भारत का सपना अधूरा है। इसी दृष्टिकोण के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने पिछले एक दशक में किसानों को केंद्र में रखते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए अभूतपूर्व पहल की है। 17वें कृषि विज्ञान सम्मेलन एवं प्रदर्शनी समारोह में बतौर विशिष्ट अतिथि डॉ0 हिमांशु पाठक,अध्यक्ष नास,ने कहा कि इस कांग्रेस में बढ़ती आबादी, प्रदूषण और आधुनिक खेती के माध्यम से कैसे अधिक उत्पादन हो इसपर चर्चा होगी। साथ ही भविष्य में चुनौतियों का सामना कैसे करे आदि प्रमुख विषय। उन्होने कहा कि जिस देश की 50 प्रतिशत जनता प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से कृषि से जुड़ी है उस देश की जनता का विकास तभा हो सकता है जब कृषि का विकास हो।
राज्यपाल ने किया 17वीं कृषि विज्ञान कांग्रेस का शुभारम्भ

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