January 16, 2026

सियोल कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला- दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल को पांच साल की जेल

सियोल कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला- दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल को पांच साल की जेल

महाभियोग के बाद पूर्व राष्ट्रपति को पहली सजा

सियोल। दक्षिण कोरिया की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। एक स्थानीय अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल को मार्शल लॉ से जुड़े एक मामले में दोषी ठहराते हुए पांच साल की जेल की सजा सुनाई है। यह फैसला उस मामले में आया है, जिसमें यून सुक योल पर वर्ष 2024 के अंत में देश में अस्थायी रूप से मार्शल लॉ लागू करने का आरोप लगाया गया था।

सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट का फैसला
सियोल के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई पूरी होने के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति को गिरफ्तारी से बचने और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई का विरोध करने का दोषी माना। यह सजा यून सुक योल के खिलाफ दर्ज आठ मामलों में से पहले मामले में सुनाई गई है।

अभियोजन ने मांगी थी 10 साल की सजा
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने यून सुक योल के लिए 10 साल की जेल की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए पांच साल की सजा सुनाई। यून की कानूनी टीम ने अभियोजन की मांग को राजनीति से प्रेरित बताया और कहा कि इसका ठोस कानूनी आधार नहीं है।

महाभियोग के बाद हुई थी गिरफ्तारी
यून सुक योल को पहले महाभियोग के जरिए राष्ट्रपति पद से हटाया गया था, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। उन पर आरोप है कि दिसंबर 2024 में उन्होंने सत्ता में बने रहने के इरादे से देश में मार्शल लॉ लागू किया। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह कदम लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ था।

यून का बचाव और गंभीर आरोप
अपने बचाव में यून सुक योल ने कहा कि उनका उद्देश्य देश में सैन्य शासन लागू करना नहीं था, बल्कि जनता को यह दिखाना था कि संसद पर कुछ राजनीतिक ताकतों का प्रभाव बढ़ रहा है। हालांकि जांच में आरोप लगाए गए कि उन्होंने सत्ता का दुरुपयोग किया और विद्रोह जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया। इन गंभीर आरोपों के तहत उन्हें आगे और कड़ी सजा का भी सामना करना पड़ सकता है।

फिलहाल, सजा के एलान के बाद पूर्व राष्ट्रपति की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जबकि देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस फैसले को लेकर व्यापक चर्चा जारी है।