देहरादून। उत्तराखंड की सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं में हिंदू वर्ष के साथ शुरू हुए चैत्र माह का विशेष महत्व है। इस माह में उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्र में विशेष रूप से मनायी जाने वाली भिटौली की परंपरा बेटियों और बहनों के रूप में महिलाओं के प्रति प्रेम और स्नेह का प्रतीक है। भिटौली उत्तराखंड का एक पारंपरिक पर्व है, जो चैत्र माह में मनाया जाता है। परंपरा के अनुसार, नवविवाहित बेटी को पहली भिटौली वैशाख माह में दी जाती है, और इसके बाद हर वर्ष चैत्र माह में यह परंपरा निभायी जाती है। इस दौरान माता-पिता अपनी बेटी के ससुराल जाते हैं और उसे नई फसल से घर का बना भोजन, मिठाइयां, कपड़े और अन्य उपहार देते हैं। यह परंपरा बेटियों को उनके मायके से जोड़े रखने का एक भावनात्मक माध्यम है। चैत्र माह में नयी फसल के आने का उत्सव भी मनाया जाता है, और भिटौली इस उत्सव का हिस्सा बनकर खुशहाली का संदेश देती है। भिटौली उत्तराखंड में समाज की रीढ़ मानी जाने वाली महिलाओं की बड़ी सामाजिक भूमिका, सम्मान, स्नेह व प्रेम को भी रेखांकित करता है।
प्रेम और स्नेह का प्रतीक भिटौली

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