April 5, 2025

Shatdal

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भूजल को लेकर दसवां अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू

रुड़की। राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की में भूजल को लेकर दसवां अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आज शुरू हुआ इसमें केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटील ने भाग लिया दो दिवसीय सम्मेलन में देश-विदेश के कई विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं जिसमें जलवायु परिवर्तन के कारण भूजल पर पढ़ रहे प्रभाव को लेकर विशेषज्ञ अपनी राय रखेंगे और भूजल को बचाए रखने के लिए समाधान खोजेंगे जिससे केंद्र सरकार को भविष्य में इन सुझावों के आधार पर भावी रणनीति बनाने में मदद मिलेगी। केंद्रीय मंत्री जल शक्ति मंत्री सीआर पाटील ने कहा कि राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान केंद्र सरकार की मदद करता है और जलवायु परिवर्तन के कारण भूजल पर पड़ रहे प्रभाव एवं इसकी सुरक्षा को लेकर व्यापक अनुसंधान करके इसके लिए वह महत्वपूर्ण सुझाव देता है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भूजल की उपलब्धता बनाए रखने के लिए अनेक दिशा में काम किया जा रहे हैं इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए है। इसके अलावा अटल भूजल योजना के तहत भी वर्षा के पानी को रेन हार्वेस्टिंग तकनीक के जरिए रिचार्ज करने का भी काम लगातार जारी है और इसमें जागरूकता के कारण भूजल को बचाने में काफी मदद मिल रही है और इस दिशा में लगातार काम जारी है उन्होंने कहा कि सम्मेलन में विश्व भर के विशेषज्ञ भाग लेंगे जिनके सुझावों के आधार पर सरकार को भविष्य में भोजन को बचाने में भावी योजना बनाने में मदद मिलेगी। निदेशक महोदय, इस सम्मेलन का राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान के निदेशक एमके गोयल का कहना है कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव आज हर किसी को महसूस हो रहा है। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य है यह जानना है कि जलवायु परिवर्तन का भूजल पर क्या प्रभाव पड़ेगा और भविष्य में हम इसका किस प्रकार प्रबंध कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का एक स्पष्ट विज़न है कि वर्ष 2047 तक हमारा देश आत्मनिर्भर और विकसित हो, उसी दिशा में यह सम्मेलन एक महत्वपूर्ण कदम है। इसमें 300 से अधिक विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं, जिनमें लगभग 25-30 अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ भी शामिल हैं। यह सभी इस विषय पर गहन मंथन करेंगे और यह सुझाव देंगे कि 2047 तक भूजल को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से सुरक्षित रखने के लिए कौन-कौन से उपाय किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण कई प्राकृतिक संसाधन प्रभावित हो रहे हैं, जिनमें भूजल भी शामिल है। वर्षा के दिनों की संख्या कम हो रही है, लेकिन जब बारिश होती है, तो उसकी तीव्रता बढ़ जाती है। इसका मतलब है कि एक सीमित समय में अत्यधिक वर्षा होती है, जिससे बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है। साथ ही, इस तेज़ वर्षा के कारण जल को ज़मीन में अवशोषित होने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता, जिससे भूजल स्तर में गिरावट आ रही है।
जलशक्ति मंत्रालय इस दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही है। और वर्षा के जल संचय स को सरकारी कार्यालयों में अनिवार्य किया जा रहा है, ताकि हम वर्षा जल को संरक्षित कर भूजल पुनर्भरण कर सकें। यह प्रयास न केवल सरकारी स्तर पर बल्कि व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर भी किए जाने चाहिए। जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़ और सूखे की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। यदि हमें इन समस्याओं से निपटना है, तो जल संरक्षण ही एकमात्र समाधान है। जहाँ जल उपलब्ध है, वहाँ इसे संरक्षित करना होगा और जहाँ कमी है, वहाँ जल के कुशल उपयोग की आवश्यकता है। अब जल की बर्बादी की कोई गुंजाइश नहीं बची है। हर व्यक्ति को जल संरक्षण की दिशा में कदम उठाने होंगे। व्यक्तिगत स्तर पर हम छोटे-छोटे प्रयास कर सकते हैं, जैसे नल को खुला न छोड़ना, पानी की फिजूलखर्ची रोकना। सामुदायिक स्तर पर हमें नए तालाब बनाने के साथ साथ पुराने जल रिचार्ज ढाँचों का पुनर्जीवन करना होगा। यही एकमात्र समाधान है जिससे हम जल सुरक्षा को सुनिश्चित कर सकते हैं।