कभी आपने कंडाली की मार खाई शायद नहीं, सब्जी खाई नहीं तो एक बार इस सुपर फूड की सब्जी, धबड़ी को खाना, सूप को और इसकी हर्बल चाय को जरूर पीना, इसमें निरोग जीवन का राज छिपा हुआ है। हमारे पहाड़ में गर्म तासिर वाले औषधीय गुणों से भरपूर इस पौधे को बिच्छू घास कंडाली, सिसौण सिसुण कहा जाता है। नेपाल, हिमाचल के पहाड़ी भी इसके गुण को समझते हुए इसे अपने भोजन में शामिल करते हैं। जब पहाड़ में किसी को मोच आ जाए तो ये हमारा पहला डॉक्टर होता है। जिसे लोग घास समझ नकार देते हैं वो विटामिन ए, बी , सी, डी, कैल्शियम, आयरन , सोडियम, मैंगनीज और प्रोटीन का खजाना है। ये गठिया, मांसपेशियों के दर्द और जोड़ों के दर्द कम करने में एक प्राकृतिक पेनकिलर का काम करता है। ये खून की कमी को दूर करता है, हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है।
किडनी को स्वस्थ रखने, पाचन को दुरुस्त रखता है। ये हमारे शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। बालों को झड़ने से रोकता है, आपके चेहरे पर कांति लाता है। जिसे हम बेकार समझते हैं , इसके गुणों के चलते बाजार में ये बाजार में 200 से 500 रुपये तक बिक रहा। हिमाचल के सोलन के बनलगी मंडी में इसकी खरीद व बिक्री होती है। यहां किसानों से कंडाली 15 से 40 रुपये किलो खरीदी जाती है। उत्तराखण्ड में भी कंडाली आय का जरिया बन सकता है, बस जरूरत है, कर्ता धर्ता इसे लेकर कोई कार्य योजना बनाए।

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