April 6, 2025

Shatdal

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कार्यशाला का आयोजन

टिहरी । विवेक मेमोरियल सुरगंगा संगीत विद्यालय और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) की पहल ओर भारत सरकार के संस्कृति विभाग के सौजन्य से उत्तराखंड के मौखिक लोग-गाथा गीतों में विद्यमान श्री कृष्ण का लोक इतिहास विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मुख्य वक्ता पद्मश्री प्रख्यात जागर गायिका डॉ. बसंती बिष्ट ने विषय को लेकर डीएलएड प्रशिक्षणार्थियों और संगीत के छात्र-छात्राओं को महत्वपूर्ण जानकारी दी। इस दौरान डॉ0 बिष्ट को इस वर्ष का सुरगंगा कलानिधि सम्मान भी दिया गया।
डायट सभागार में आयोजित कार्यशाला में पद्मश्री डॉ. बसंती बिष्ट ने कहा उत्तराखंड के लोक जीवन में भगवान विष्णु विराजमान हैं। श्री कृष्ण की जागर को उन्होंने अपनी माता से सीखा। कहा कि शास्त्रीय संगीत भी हमारे लोक संगीत से मिलता-जुलता है। जागर के लिए सुर-ताल के अलावा कोई स्थाई समय सीमा और अंतरा नहीं होता है। कहा कि श्रीकृष्ण द्वापर युग में दो बार देवभूमि उत्तराखंड आए थे। पहला प्रसंग उखा-अनिरूद्ध विवाह और दूसरा सेम-मुखेम। सेम-मुखेम में तो उन्होंने स्थान मांगने के लिए गढ़पति गंगू रमोला से साधु वेष में अनुरोध किया था। डॉ. बिष्ट ने मुखेम आलू सेम-नागराजा, कनू रंदू भग्यान नागराजा तै मुखेम, वांडू देखा फांडू तै सेमा कू डांडू, यनी जगा भगवान तुम लेंदा अवतार सहित हे गंगू रमोला में जगा दियाल सहित श्रीकृष्ण के लोक इतिहास पर विस्तृत जागरों के माध्यम से प्रकाश डाला। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से इस ओर शोध करने का सुझाव भी दिया। कहा कि इसके लिए वह भी सहयोग देंगी। उन्होंने कहा कि लोग संस्कृति को बचाने के लिए शिक्षा का होना जरूरी है ,लोग संस्कृति को बचाने के लिए महिला मंगल ,दल युवक मंगल दल सहित ग्रामीण महिला ,पुरुषों को मानदेय पर प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्त करने का सुझाव दिया।वडायट की प्रधानाचार्य डॉक्टर हेमा भट्ट ने बताया कि आज पदम श्री डॉक्टर बसंती बिष्ट ने डाइट में प्रशिक्षण ले रहे डीएलएड का प्रशिक्षण ले युवाओं को उत्तराखंड में लोक कथाओं और लोक जागरों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशिक्षण की बात जब इन युवाओं को ग्रामीण अंचलों में कार्य करने का मौका मिलेगा, तो वह बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ लोक संस्कृति को भी बचाने का काम करेंगे। विवेक मेमोरियल सुरगंगा संगीत विद्यालय और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) की पहल ओर भारत सरकार के संस्कृति विभाग के सौजन्य से उत्तराखंड के मौखिक लोग-गाथा गीतों में विद्यमान श्री कृष्ण का लोक इतिहास विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मुख्य वक्ता पद्मश्री प्रख्यात जागर गायिका डॉ. बसंती बिष्ट ने विषय को लेकर डीएलएड प्रशिक्षणार्थियों और संगीत के छात्र-छात्राओं को महत्वपूर्ण जानकारी दी। इस दौरान डॉ बिष्ट को इस वर्ष का सुरगंगा कलानिधि सम्मान भी दिया गया।डायट सभागार में आयोजित कार्यशाला में पद्मश्री डॉ. बसंती बिष्ट ने कहा उत्तराखंड के लोक जीवन में भगवान विष्णु विराजमान हैं। श्री कृष्ण की जागर को उन्होंने अपनी माता से सीखा। कहा कि शास्त्रीय संगीत भी हमारे लोक संगीत से मिलता-जुलता है। जागर के लिए सुर-ताल के अलावा कोई स्थाई समय सीमा और अंतरा नहीं होता है। कहा कि श्रीकृष्ण द्वापर युग में दो बार देवभूमि उत्तराखंड आए थे। पहला प्रसंग उखा-अनिरूद्ध विवाह और दूसरा सेम-मुखेम। सेम-मुखेम में तो उन्होंने स्थान मांगने के लिए गढ़पति गंगू रमोला से साधु वेष में अनुरोध किया था। डॉ. बिष्ट ने मुखेम आलू सेम-नागराजा, कनू रंदू भग्यान नागराजा तै मुखेम, वांडू देखा फांडू तै सेमा कू डांडू, यनी जगा भगवान तुम लेंदा अवतार सहित हे गंगू रमोला में जगा दियाल सहित श्रीकृष्ण के लोक इतिहास पर विस्तृत जागरों के माध्यम से प्रकाश डाला। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से इस ओर शोध करने का सुझाव भी दिया। कहा कि इसके लिए वह भी सहयोग देंगी। उन्होंने कहा कि लोग संस्कृति को बचाने के लिए शिक्षा का होना जरूरी है ,लोग संस्कृति को बचाने के लिए महिला मंगल ,दल युवक मंगल दल सहित ग्रामीण महिला ,पुरुषों को मानदेय पर प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्त करने का सुझाव दिया। डायट की प्रधानाचार्य डॉक्टर हेमा भट्ट ने बताया कि आज पदम श्री डॉक्टर बसंती बिष्ट ने डाइट में प्रशिक्षण ले रहे डीएलएड का प्रशिक्षण ले युवाओं को उत्तराखंड में लोक कथाओं और लोक जागरों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशिक्षण की बात जब इन युवाओं को ग्रामीण अंचलों में कार्य करने का मौका मिलेगा, तो वह बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ लोक संस्कृति को भी बचाने का काम करेंगे। लोक संस्कृति एवं साहित्य से जुड़े महीपाल सिंह नेगी ने कहा कि आज डाइट में जो कार्यक्रम आयोजित हुआ है ।इससे यहां के युवाओं को अपनी संस्कृति,लोक गाथाओं के बारे में जानकारी मिलेगी । उन्होंने कहा कि कृष्ण एवं पांडवों की लोक गाथाओं गीतों में जो कथा आती है उसका प्रसंग क्या है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोक गाथाओं में शौर्य गीत, प्रणय गीत आदि भी आते हैं ।