देहरादून, उत्तराखंड

——————————————-
अब जब भी गॉव जाता हूॅं
गाड़ी से नीचे उतरते ही
पानी की बोतल हाथ में लिए
तुम मुझे महसूस होती हो मॉ।
किसी को रास्ते में, गाय चुगाते देख
उनमें तुम्हारी अन्वार, झलकती है मॉ।
खेतों में पकी फसल काटते हुये देख
उनमें तुम्हारी सूरत सी दिखती है मॉ।
घर के ऑंगन में पहॅुचते ही देहली में
खड़े होकर मुस्कराते हुए दिखती हो मॉ
चारपाई में बैठते ही, सामने तस्वीर में
कुछ बोलने का अहसास सा होता है मॉ।
घर के ऑंगन में चावल फटकने हुए
तुम्हारी चुड़ियों की खनक सुनायी देती है
खाना खाते वक्त, रोटी लिये हुए हाथ में
दो रोटी और खाले, यह सुनाई देता है मॉ।
रात को सोते समय, सिरहाने में खड़ी हो
हाल चाल पूछकर, चितां व्यक्त करती हो
सब ठीक होगा, यह विश्वास दिलाती हो
थक है अब सो जा, ऐसा सुनाई देता है मॉ।
बैग में सामान रखते वक्त तुम दिखती हो पास
ये भी ले जा, वो भी ले जा, यह है तेरे लिए खास
सिर में जैसे हाथ रख दिया ऐसा होता अहसास
बस ऐसा लगता है, लेकिन तुम नहीं हो मेरे पास।

More Stories
शिक्षा विभाग में चतुर्थ श्रेणी के 2364 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू
गुलदार के हमले में 5 वर्षीय मासूम की मौत
प्राधिकरण क्षेत्रान्तर्गत विभिन्न क्षेत्रों में अवैध बहुमंजिला निर्माणों पर प्राधिकरण की सख़्त कार्रवाई