देहरादून। प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन के पहले सत्र में जल, जंगल और जमीन के संरक्षण पर गहन चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि विकास और पारिस्थितिकी के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। इस दौरान सुझाव दिया गया कि जीडीपी तय करते समय पारिस्थितिकी प्रगति को भी एक महत्वपूर्ण पैमाने के रूप में शामिल किया जाना चाहिए।
सम्मेलन के दूसरे सत्र में संस्कृति, शिक्षा और स्वास्थ्य पर विमर्श हुआ, जिसमें नारी शक्ति केंद्र में रही। वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं के विकास के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि महिला स्वयं सहायता समूहों ने राज्य में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा दी है। सम्मेलन में प्रवासी उत्तराखंडियों ने राज्य के विकास के लिए अपने सुझाव दिए और संभावित योगदान पर चर्चा की।
प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन में हुई जल, जंगल और जमीन पर चर्चा
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